क्रिप्टो क्रांति 2025: अमेरिका डिजिटल सुपरपावर, भारत कहाँ?

अमेरिकी और भारतीय झंडे ब्लॉकचेन नेटवर्क और बिटकॉइन सिंबल के साथ

पिछला हफ्ता क्रिप्टो और इंटरनेट कैपिटल मार्केट्स के लिए बड़ा धमाका लेकर आया। अमेरिका के SEC चेयरमैन पॉल एटकिन्स ने 31 जुलाई 2025 को “प्रोजेक्ट क्रिप्टो” लॉन्च किया, जिसका मकसद है अमेरिका को क्रिप्टो और ब्लॉकचेन का ग्लोबल बॉस बनाना। लेकिन सवाल ये है कि इस क्रिप्टो रेस में भारत कहाँ खड़ा है? चलो, आसान शब्दों में समझते हैं कि क्रिप्टो की दुनिया में क्या चल रहा है और भारत-अमेरिका इस डिजिटल क्रांति में कैसे गेम चेंज कर रहे हैं।


 

प्रोजेक्ट क्रिप्टो: अमेरिका का बड़ा दांव डिजिटल Portfolio इकोसिस्टम पर

 

 अमेरिकी क्रिप्टो रेगुलेशन में बदलाव के प्रतीक। image

SEC चेयरमैनPaul Atkins ने कहा कि पुराने नियम क्रिप्टो की रफ्तार रोक रहे हैं। अब वो नए, स्मार्ट और सुरक्षित नियम लाएंगे। प्रोजेक्ट क्रिप्टो की खास बातें:

  • क्रिप्टो कोई सिक्योरिटी नहीं: बिटकॉइन, इथेरियम जैसी ज्यादातर क्रिप्टोकरेंसी को सिक्योरिटी नहीं माना जाएगा। ये पुराने SEC बॉस गैरी गेन्सलर के सख्त रुख से उलट है।
  • स्टार्टअप्स को मौका: क्रिप्टो स्टार्टअप्स को पुराने नियमों से छूट मिलेगी, ताकि वो नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करें।
  • अपना वॉलेट, अपना हक: लोग अपने क्रिप्टो वॉलेट में एसेट्स रख सकते हैं। एटकिन्स ने इसे बेसिक अधिकार बताया।
  • सुपर-ऐप्स और टोकनाइजेशन: सुपर-ऐप्स बनेंगे, जहाँ स्टॉक्स और क्रिप्टो एक साथ ट्रेड होंगे। साथ ही, स्टॉक्स-बॉन्ड्स को ब्लॉकचेन टोकनाइजेशन से जोड़ा जाएगा।

 

भारत क्रिप्टो रेस में कहाँ? नियम औरआर्थिक वृद्धि

2025 भारत का नक्शा जिस पर बिटकॉइन के सिंबल चमक रहे हैं

भारत में क्रिप्टो को लेकर जोश है, लेकिन साफ नियमों की कमी है। यहाँ की स्थिति:

  • रेगुलेशन का इंतजार: भारत सरकार और RBI क्रिप्टो रेगुलेशन पर काम कर रहे हैं। 2024 की G20 समिट में भारत ने ग्लोबल क्रिप्टो स्टैंडर्ड्स की बात की। जल्द ही क्रिप्टो बिल संसद में आ सकता है।
  • टैक्स सिस्टम: क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस पर 30% टैक्स और 1% TDS है। KYC जरूरी है, जिससे सरकार ट्रैक रखती है।
  • बड़ा यूजर बेस: भारत के 10 करोड़+ क्रिप्टो यूजर्स दुनिया में टॉप पर हैं। WazirX, CoinDCX जैसे प्लेटफॉर्म्स सुपरहिट हैं।
  • डिजिटल रुपया: RBI का e-Rupee (CBDC) पायलट ब्लॉकचेन पर चल रहा है, जो भारत को टेक्नोलॉजी में आगे रखता है।
  • चुनौतियाँ: साफ नियम न होने से बिजनेस और इनवेस्टर्स हिचक रहे हैं। अमेरिका के नए नियम भारत के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।

 

अमेरिका में पहले से कितना बदलाव? SEC का बदलता दृष्टिकोण

 

पहले SEC ने “रेगुलेशन बाय एनफोर्समेंट” अपनाया, जिससे क्रिप्टो कंपनियाँ अमेरिका छोड़ गईं। अब एटकिन्स का तरीका अलग है:

  • नए नियम: नियम अब पब्लिक फीडबैक से बनेंगे।
  • क्रिप्टो टास्क फोर्स: Hester Pearce (“Cryptomom”) इसे लीड कर रही हैं।
  • केस खत्म: रिपल, कॉइनबेस जैसे बड़े केस बंद हो गए।

 

इंडस्ट्री का जोश: “क्रिप्टो की नई सुबह”

 

X पर लोग इसे “क्रिप्टो की नई सुबह” कह रहे हैं। एक्सपर्ट्स, जैसे माइक पिवोवर, इसे “बिग बैंग” मोमेंट मानते हैं। भारत में क्रिप्टो कम्युनिटी भी अमेरिका के नियमों से उत्साहित है और चाहती है कि यहाँ भी ऐसे कदम उठें।


 

क्या हैं रुकावटें? ग्लोबल क्रिप्टो रेस में चुनौतियाँ

 

  • कानून का इंतजार: अमेरिका और भारत में नए कानून जरूरी हैं। भारत में CLARITY एक्ट जैसे बिल्स का इंतजार है।
  • SEC में कटौती: अमेरिका में SEC स्टाफ में 10-15% कटौती हो रही है, जो प्रोसेस को धीमा कर सकती है।
  • ग्लोबल रेस: यूरोप (डिजिटल यूरो) और यूके (CBDC लैब) भी क्रिप्टो में तेज हैं।

 

आगे क्या? क्रिप्टो रेगुलेशन और इनोवेशन का भविष्य

 

  • नए नियम: SEC और भारत जल्द क्रिप्टो रेगुलेशन लाएंगे।
  • ETF और स्टेबलकॉइन्स: अमेरिका में क्रिप्टो ETF और स्टेबलकॉइन्स के लिए गाइडलाइंस आएंगी।
  • सैंडबॉक्स: ग्लोबल सैंडबॉक्स बनेगा, जहाँ नए प्रोडक्ट्स टेस्ट होंगे।

 

बस इतना ही? भारत और अमेरिका की डिजिटल क्रांति

 

प्रोजेक्ट क्रिप्टो अमेरिका को क्रिप्टो का सुपरपावर बना सकता है, और भारत भी पीछे नहीं है। साफ नियमों के साथ दोनों देश डिजिटल फाइनेंस में छा सकते हैं। X पर लोग इस क्रांति को लेकर जोश में हैं।

तो, bro, तैयार है इस क्रिप्टो लहर का हिस्सा बनने के लिए?

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